बनारस: ट्रेन में युवती को घूरने से मना करने पर युवक ने जड़ा थप्पड़, वीडियो वायरल होने पर रेलवे ने लिया संज्ञान

वाराणसी: भारतीय रेलवे में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वाराणसी की एक युवती का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक उसे थप्पड़ मारते और बदसलूकी करते नजर आ रहा है। घटना तब हुई जब युवती ने उसे लगातार घूरने से मना किया और विरोध स्वरूप मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित युवती, जिसकी पहचान स्वीटी राजपूत के रूप में हुई है, अपनी दो बहनों के साथ बिहार के आरा से बनारस (वाराणसी) लौट रही थीं। स्वीटी के अनुसार, सामने वाली अपर बर्थ पर बैठा एक अज्ञात युवक उन्हें पिछले दो घंटों से लगातार घूर रहा था। असहज महसूस करने पर जब स्वीटी ने अपना कैमरा चालू किया और उससे घूरने का कारण पूछा, तो युवक अचानक उग्र हो गया।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि युवक नीचे उतरता है और बिना किसी डर के युवती को थप्पड़ मार देता है। इस दौरान ट्रेन में काफी शोर-शराबा और झड़प भी हुई। युवक खुद को रेलवे का कर्मचारी बताकर धौंस जमाने की कोशिश कर रहा था।

“पुलिस आती रही, पर कार्रवाई नहीं हुई”

युवती ने इंस्टाग्राम पर आपबीती साझा करते हुए बताया कि घटना के बाद उन्होंने रेलवे पुलिस को सूचना दी। उन्होंने आरोप लगाया कि अगले कुछ स्टेशनों पर पुलिस आई जरूर, लेकिन ट्रेन चलने से पहले ही वे चले गए। अंत में उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि यह मामला बिहार (आरा) का है, इसलिए वहीं जाकर रिपोर्ट दर्ज करानी होगी। इस बीच, मौका पाकर आरोपी युवक मुगलसराय स्टेशन के आसपास कहीं ट्रेन से उतरकर फरार हो गया।

सोशल मीडिया पर आक्रोश

वीडियो वायरल होने के बाद नेटिजन्स (Netizens) ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने न केवल उस युवक के व्यवहार की निंदा की, बल्कि कोच में मौजूद अन्य यात्रियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए जो मूकदर्शक बने रहे।

रेलवे सेवा ने दिया जवाब

मामले के तूल पकड़ने के बाद आधिकारिक हैंडल ‘@RailwaySeva’ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जवाब देते हुए पीड़ित युवती से यात्रा का विवरण और मोबाइल नंबर मांगा है, ताकि संबंधित अधिकारियों के माध्यम से मामले की जांच की जा सके।

यह घटना ट्रेनों में अकेले या परिवार के साथ सफर कर रही महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था और ‘जीरो एफआईआर’ (Zero FIR) जैसे प्रावधानों के जमीनी क्रियान्वयन पर सवालिया निशान लगाती है।

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