15 लाख का घाटा और दोस्त का धोखा, फिर भी नहीं मानी हार; दिल्ली के CP में 12 घंटे ‘मूर्ति’ बन खड़ा रहता है यह कलाकार

नई दिल्ली: दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस (CP) की रौनक के बीच अक्सर हमें कई कलाकार अपनी प्रतिभा दिखाते नजर आते हैं। इन्हीं के बीच एक ऐसा चेहरा है जो सिर से पांव तक सुनहरे रंग में रंगा होता है और घंटों तक पत्थर की तरह अडिग खड़ा रहता है। यह कहानी है 28 वर्षीय रजनीश की, जिन्हें दुनिया अब ‘गोल्डन स्टैच्यू’ के नाम से जान रही है, लेकिन इस चमकते रंग के पीछे संघर्ष की एक गहरी दास्तां छिपी है।

अर्श से फर्श तक का सफर उत्तर प्रदेश के रहने वाले रजनीश का जीवन हमेशा से ऐसा नहीं था। कुछ समय पहले तक वे एक सफल ठेकेदार (Contractor) के रूप में काम कर रहे थे। लेकिन किस्मत ने ऐसी करवट ली कि उन्हें व्यापार में करीब 15 से 20 लाख रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ा। आर्थिक तंगी के बीच उनके एक करीबी दोस्त ने उन्हें बड़ा धोखा दिया और उनका लाखों फॉलोअर्स वाला सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिया, जो उनकी उम्मीद की आखिरी किरण थी।

कठिन तपस्या और रोज 80 किमी का सफर अपने परिवार की जिम्मेदारी और घर का चूल्हा जलाने के लिए रजनीश ने हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। वे हर रोज करीब 80 किलोमीटर का सफर तय कर कनॉट प्लेस पहुँचते हैं। दिल्ली की चुभती गर्मी हो या कड़ाके की ठंड, रजनीश लगातार 12-12 घंटे तक एक ‘जीवित मूर्ति’ बनकर खड़े रहते हैं।

सेहत पर भारी पड़ती कला यह काम दिखने में जितना शांत लगता है, शारीरिक रूप से उतना ही कष्टदायक है। घंटों बिना हिले-डुले खड़े रहने के कारण उनके पैरों में गंभीर दर्द रहता है। इतना ही नहीं, शरीर पर जिस गोल्डन पेंट का वे इस्तेमाल करते हैं, उसके रसायनों (Chemicals) की वजह से उन्हें त्वचा संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। इतनी कड़ी मेहनत के बाद भी कई बार दिन भर की कमाई मात्र 200 रुपये तक ही रह जाती है।

सम्मान की अपील सोशल मीडिया पर रजनीश का एक वीडियो वायरल होने के बाद लोग उनकी हिम्मत की दाद दे रहे हैं। रजनीश का लक्ष्य एक बार फिर डिजिटल दुनिया में अपनी पहचान बनाना है ताकि वे अपने परिवार को एक बेहतर जीवन दे सकें।

यह कहानी हमें सिखाती है कि सड़क किनारे अपनी कला का प्रदर्शन करने वाले ये लोग केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये स्वाभिमानी कलाकार हैं जो अपनी मेहनत के दम पर अपनी तकदीर बदलने की कोशिश कर रहे हैं। अगली बार जब आप कनॉट प्लेस में इस ‘गोल्डन मैन’ को देखें, तो उनकी कला का सम्मान करना न भूलें।

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