खूबसूरत लातविया में पुरुषों की भारी कमी! घर के कामों के लिए ‘किराए पर पति’ लेने को मजबूर महिलाएं, घंटों के हिसाब से चुका रहीं फीस

रिगा, लातविया:

यूरोप का एक खूबसूरत देश लातविया (Latvia) इन दिनों एक गंभीर सामाजिक चुनौती का सामना कर रहा है। यहां पुरुषों की आबादी में आई भारी कमी ने देश में लैंगिक असंतुलन (Gender Imbalance) को इतना बढ़ा दिया है कि महिलाओं को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में पुरुष साथी की कमी खल रही है।

ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, इस लैंगिक असंतुलन का असर अब यहां के घरों में दिखना शुरू हो गया है। घर के छोटे-मोटे कामों, मरम्मत और रखरखाव के लिए पुरुष साथी की कमी के कारण, लातवियाई महिलाएं अब घंटों के हिसाब से पुरुषों को ‘किराए पर पति’ (Husbands on Rent) के तौर पर हायर कर रही हैं।

क्यों लेना पड़ रहा है ‘किराए पर पति’?

दरअसल, लातवियाई महिलाएं अपने घरों में प्लंबिंग, बढ़ईगीरी, बिजली का काम, पर्दे ठीक करने या टीवी लगाने जैसे कामों के लिए अक्सर पुरुष साथी की गैर-मौजूदगी महसूस करती हैं। इन घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अब वे हैंडमेन (कारीगर) सेवाओं का सहारा ले रही हैं, जिन्हें कई रिपोर्ट्स में सांकेतिक रूप से ‘किराए पर पति’ कहा जा रहा है।

‘कोमांड-24’ और ‘रेमोंटडार्बी’ जैसी कई वेबसाइटें इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए ऑनलाइन या फोन के माध्यम से पुरुषों को बुक करने की सुविधा दे रही हैं। ये पुरुष प्रशिक्षित कारीगरों के तौर पर घरेलू कामों को संभालते हैं और महिलाएं उन्हें प्रति घंटा के हिसाब से फीस देती हैं।

आंकड़े दे रहे हैं गवाही

यूरोस्टेट (Eurostat) के आंकड़ों के मुताबिक, लातविया में पुरुषों की तुलना में 15% अधिक महिलाएं हैं। यह अंतर यूरोपीय संघ के औसत लिंग अंतर से लगभग तीन गुना ज़्यादा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े लैंगिक असंतुलन का एक मुख्य कारण पुरुषों की कम जीवन प्रत्याशा (Lower Life Expectancy) है। पुरुषों का कम जीवनकाल होने की वजह से देश में उनकी संख्या लगातार कम हो रही है, जिसका असर विवाह और साझेदारी पर साफ दिख रहा है।

लातवियाई महिलाएं, जिनमें से कई कामकाजी हैं, रोज़मर्रा की ज़िंदगी में पुरुषों की इस कमी को महसूस कर रही हैं, जिसने उन्हें एक अनोखे और महंगे समाधान को अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है। यह ट्रेंड दर्शाता है कि पुरुषों की संख्या में कमी का असर सिर्फ सामाजिक ढांचे पर ही नहीं, बल्कि घरों की ज़रूरतों पर भी पड़ रहा है।

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