⚖️ फर्जी POCSO केस का रैकेट: वकील, पति और गुब्बारे वाले की तिकड़ी! – 4 करोड़ की संपत्ति जब्त

गुरुग्राम। – देश में महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए बने कड़े कानूनों, जैसे कि POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम का दुरुपयोग करके करोड़ों का ब्लैकमेलिंग रैकेट चलाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। गुरुग्राम पुलिस ने एक महिला वकील, उसके पति और एक सहयोगी को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कथित तौर पर तलाक और वैवाहिक विवादों में फंसे पतियों को झूठे POCSO मामलों में फंसाकर उनसे मोटी रकम ऐंठने का गोरखधंधा शुरू कर रखा था।

🚨 छापों में मिली बेहिसाब दौलत

पुलिस के अनुसार, यह रैकेट गुरुग्राम के पॉश टाटा प्रिमांटी सोसाइटी, सेक्टर-72 से चलाया जा रहा था। पुलिस ने जब वकील गीतिका चावला और उसके पति हर्ष कुमार के घर पर 17 घंटे तक छापा मारा, तो वहाँ से मिली संपत्ति देखकर सबके होश उड़ गए।

बरामदगी का विवरणमात्रा/मूल्य
नकद (कैश)₹ 1.15 करोड़ से अधिक
सोना और ज्वैलरीलगभग ₹ 2.9 करोड़
इलेक्ट्रॉनिक सामान11 मोबाइल फोन
अन्य साक्ष्यजाली दस्तावेज़ और फर्जी आधार कार्ड

पुलिस ने इस बेहिसाब दौलत की जांच के लिए आयकर विभाग (Income Tax Department) को भी सूचना दे दी है।

🔍 ऐसे चलता था ब्लैकमेलिंग का धंधा

पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) के खुलासे के अनुसार, इस आपराधिक गिरोह का संचालन सुनियोजित तरीके से होता था:

  1. शिकार की तलाश: यह गैंग उन पुरुषों को निशाना बनाता था जो वैवाहिक विवादों में थे और तलाक के लिए कानूनी सलाह लेने वकील गीतिका चावला के पास आते थे।
  2. विश्वास जीतना: वकील पहले कानूनी सलाहकार के रूप में पीड़ितों का विश्वास जीतती थी और उनसे उनकी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी (Personal and Financial Details) हासिल कर लेती थी।
  3. साजिश रचना: इसके बाद, वकील अपने पति हर्ष कुमार और अपने सहयोगी हनुमान (जिसे कई बार गुब्बारे वाला बताया गया) के साथ मिलकर ब्लैकमेलिंग की साजिश रचती थी।
  4. झूठा केस दर्ज कराना: वे पीड़ित की अलग रह रही पत्नी को भी इस साजिश में शामिल करते थे। फिर, फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल करके अज्ञात शिकायतकर्ता के माध्यम से, पति के खिलाफ यौन उत्पीड़न (POCSO) या अन्य गंभीर आरोप (जैसे कि बलात्कार) के तहत झूठे मामले दर्ज कराए जाते थे। हनुमान अक्सर फर्जी शिकायतकर्ता के रूप में काम करता था।
  5. समझौते का दबाव: चूंकि POCSO और रेप के मामले बेहद संगीन होते हैं और आरोपी को आसानी से जमानत नहीं मिलती, इसलिए पति पर केस वापस लेने के बदले में भारी-भरकम समझौते की रकम (Settlement Amount) देने का दबाव बनाया जाता था।
  6. पैसे का बंटवारा: इस तरह हुई जबरन वसूली की रकम में से, एक बड़ा हिस्सा वकील और उसके गिरोह को मिलता था, जबकि पीड़ित की पत्नी को भी मोटी एलिमोनी या मेंटेनेंस के रूप में राशि मिल जाती थी।

💔 कानून का दुरुपयोग: न्याय व्यवस्था पर सवाल

यह मामला न केवल एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि यह कानूनी नैतिकता (Legal Ethics) और समाज में न्याय की भावना पर भी गहरा आघात है। जिन कानूनों को बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया है, उनका इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ और जबरन वसूली के लिए किया जा रहा था।

सुप्रीम कोर्ट भी कई बार वैवाहिक विवादों और निजी रंजिश में POCSO जैसे कड़े कानूनों के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त कर चुका है। झूठे मामलों के कारण एक बेकसूर व्यक्ति की प्रतिष्ठा, करियर और जीवन बर्बाद हो जाता है। पुलिस अब इस गैंग द्वारा फंसाए गए अन्य पीड़ितों की पहचान कर रही है और पुराने मामलों को फिर से खोला जा रहा है।

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