
मुंबई से जुड़ी जड़ों वाले ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉलर रायन विलियम्स ने आखिरकार भारतीय नागरिकता ले ली है। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ, 32 वर्षीय विलियम्स अब भारत की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व करने के योग्य हो गए हैं। यह भारतीय फुटबॉल के लिए एक बड़ी खबर है, क्योंकि विलियम्स को इसी महीने एएफसी एशियन कप 2027 क्वालीफ़ायर में बांग्लादेश के खिलाफ़ ‘ब्लू टाइगर्स’ के लिए डेब्यू करते देखा जा सकता है।
नागरिकता छोड़ने का बड़ा फैसला
बेंगलुरु एफसी के कप्तान विलियम्स ने आधिकारिक तौर पर अपनी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता छोड़ दी है और अब वह भारतीय पासपोर्ट धारक हैं। वह भारतीय नागरिकता लेने वाले दूसरे पेशेवर फुटबॉलर बन गए हैं। विलियम्स ने बताया कि इस प्रक्रिया में एक साल से अधिक का समय और कई कागजी कार्रवाई शामिल थी, लेकिन उनके लिए देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर इतना बड़ा था कि यह सब नगण्य हो गया।
विलियम्स ने कहा, “भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना किसी भी पेशेवर फुटबॉलर के लिए सबसे गर्व का पल होता है। मैं भारत की जर्सी पहनकर देश और टीम के लिए अपना सब कुछ झोंक दूंगा।”
पारिवारिक जुड़ाव और ‘घर वापसी’

विलियम्स का यह कदम सिर्फ खेल से नहीं, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव से प्रेरित है। उनके नाना, लिंकन एरिक ग्रोस्टेट, मुंबई के एक जाने-माने फुटबॉलर थे, जिन्होंने 1956 में रणजी ट्रॉफी में बॉम्बे टीम का प्रतिनिधित्व किया था। विलियम्स की माँ का जन्म भी भारत में हुआ था।
विलियम्स के लिए यह एक तरह से ‘घर वापसी’ है। उन्होंने बताया कि उनके नाना चाहते थे कि वह भारत में खेलें। यह फैसला उनकी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने जैसा है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
32 साल की उम्र में भी रायन विलियम्स शानदार फॉर्म में हैं। बेंगलुरु एफसी के लिए उन्होंने हाल के मैचों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उनका मानना है कि उनके इस कदम से अन्य भारतीय मूल के पेशेवर फुटबॉलरों को भी राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने के लिए प्रेरणा मिलेगी, जिन्हें विदेशी नागरिकता छोड़ने में हिचकिचाहट होती है। यह कदम भारतीय फुटबॉल में नई ऊर्जा और आशा का संचार करता है।










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