जीते-जी अपनी मौत का दृश्य देखने के लिए रिटायर्ड सैनिक ने निकाली खुद की शवयात्रा, फिर कराया सामूहिक भोज

गयाजी, बिहार: बिहार के गयाजी जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। गुरुआ ब्लॉक के कोंची गांव में रहने वाले एक रिटायर्ड एयरफोर्स सैनिक मोहनलाल ने अपनी मृत्यु से पहले ही अपनी ‘अंतिम यात्रा’ निकालने का फैसला किया और इसे बकायदा पूरा भी किया।

मोहनलाल ने न सिर्फ खुद की शवयात्रा निकाली, बल्कि फूल-मालाओं से सजी अर्थी पर लेटकर मुक्तिधाम (शमशान घाट) तक भी गए। मुक्तिधाम पहुँचने के बाद, उन्होंने सभी रीति-रिवाजों का पालन करते हुए अपना प्रतीकात्मक दाह संस्कार करवाया और इसके बाद वहां उपस्थित सभी लोगों के लिए सामूहिक भोज का आयोजन भी किया। इस अनोखी घटना ने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

‘देखना था कि मेरी मौत पर कितने लोग आते हैं’

जब मोहनलाल से इस विचित्र कदम के पीछे का कारण पूछा गया, तो उन्होंने जो जवाब दिया वह उनके जीवन दर्शन को दर्शाता है। उनका कहना था कि वह जीते-जी यह देखना चाहते थे कि उनकी मौत के बाद कितने लोग उन्हें सम्मान देने आते हैं। मोहनलाल का मानना है कि इंसान जीवन में क्या कमाता है, इसका असली प्रमाण उसकी अंतिम यात्रा में शामिल होने वाली भीड़ होती है।

उन्होंने बताया, “जीते-जी तो सब पूछते हैं, लेकिन असली कमाई तो यह है कि मरने के बाद आपकी शवयात्रा में कितने लोग आते हैं। मैं चाहता था कि मरने के बाद लोग मेरी अर्थी उठाते, लेकिन मैं खुद इस दृश्य को देखूं और जान सकूं कि लोग मुझे कितना स्नेह देते हैं।”

बैंड-बाजे के साथ पहुँचे मुक्तिधाम

मोहनलाल की यह अंतिम यात्रा किसी नाटक का हिस्सा नहीं थी, बल्कि इसे एक असली अंतिम संस्कार की तरह ही आयोजित किया गया। एक सजी हुई अर्थी तैयार की गई, जिस पर वह बिल्कुल एक शव की तरह लेटे रहे। यात्रा में उनके परिवार के सदस्य, बेटे और गाँव के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। बैंड-बाजे के साथ ‘राम नाम सत्य है’ की गूँज के बीच यह यात्रा मुक्तिधाम पहुँची, जहाँ प्रतीकात्मक रूप से उनका पुतला जलाया गया। दाह संस्कार की रस्म पूरी होने के बाद, सामूहिक भोज में सभी लोगों ने भोजन किया।

मोहनलाल अपने क्षेत्र में समाजसेवा के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने कुछ समय पहले ही अपने निजी खर्च पर गांव में एक सुविधाओं से लैस मुक्तिधाम का निर्माण करवाया था, ताकि बरसात में ग्रामीणों को शव जलाने में परेशानी न हो। उनकी इस अनोखी इच्छा और उसे पूरे करने के तरीके ने स्थानीय लोगों को स्तब्ध कर दिया है और यह घटना दूर-दूर तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

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